नई दिल्ली, मार्च 1 -- शशांक, पूर्व विदेश सचिव ईरान युद्ध का अंदेशा तो था, लेकिन इस आक्रामकता के कयास नहीं लगाए गए थे। अब जब अमेरिकी और इजरायली हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ही नहीं, उनके रक्षा मंत्री, आईआरजीसी मुखिया समेत कई महत्वपूर्ण लोग मारे गए हैं, तब मध्यपूर्व में वार और पलटवार भी बढ़ गया है। यह लग रहा है कि इस जंग का मकसद ईरान में सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, पूरे इस्लामी शासन का अंत है। अब बड़ा सवाल यह है कि खामेनेई के बाद ईरान का क्या होगा? एक हिसाब यह भी लगाया जा रहा है कि यह युद्ध पश्चिम एशिया और विश्व राजनीति को किस कदर प्रभावित करेगा? खबर है कि अयातुल्ला अराफी ने फिलहाल खामेनेई की जिम्मेदारी संभाल ली है, जो साफ संकेत है कि ईरान में इस्लामी शासन का अंत इतना आसान नहीं। खामेनेई भले ही सर्वोच्च नेता थे, लेकिन ...