इस्लामाबाद, मार्च 31 -- अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में मध्यस्थ यानी बिचौलिए के रूप में पाकिस्तान का नाम सामने आ रहा है। इससे कई लोग हैरान हैं। लेकिन अगर कूटनीतिक और रणनीतिक नजरिए से देखा जाए, तो यह उतना भी आश्चर्यजनक नहीं है। दरअसल पाकिस्तान ने इस पूरे विवाद में एक बहुत ही सधा हुआ कूटनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश की है। क्योंकि इस जंग में पाकिस्तान की साख और भविष्य दोनों दांव पर हैं। क्यों? आइए इसे विस्तार से समझते हैं।यह भूमिका आश्चर्यजनक क्यों नहीं है? पाकिस्तान के इस मध्यस्थता वाले कदम के पीछे कई अहम कारण हैं। सबसे पहला तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन है। ट्रंप और पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर के बीच काफी अच्छे समीकरण बताए जाते हैं। ट्रंप अक्सर मुनीर को अपना 'पसंदीदा' फील्ड मार्शल बताते हैं और उन...