नई दिल्ली, अप्रैल 12 -- अरविंद गुप्ता, पूर्व राजनयिक एवं डायरेक्टर, वीआईएफ अविश्वास के माहौल में हुई बातचीत का यही हश्र होता है। अमेरिका-ईरान वार्ता पर बेशक दुनिया की निगाह बनी हुई थी, लेकिन इन दोनों देशों में जिस तरह के गहरे मतभेद हैं, उनको देखते हुए महज एक बैठक में सहमति बनने की संभावना भी नहीं थी। इस्लामाबाद में यही हुआ है। नतीजतन, वार्ता बेनतीजा रही। प्रश्न अब कई हैं। क्या अमेरिका फिर से हमला बोलेगा या कूटनीतिज्ञों को मौका दिया जाएगा? क्या दोनों पक्षों ने इस युद्ध से सबक सीख लिया या बेमतलब हिंसा का सिलसिला फिर से शुरू हो जाएगा? सवाल यह भी है कि क्या अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सलाह पर गौर करेंगे या अमेरिकी राष्ट्रपति के फैसले में नेतन्याहू बेमानी साबित हो जाएंगे? पाकिस्तान क्या आने वाले दिनों...