ईद उल अजहा त्याग, इंसानियत और भाईचारे का पैगाम
बिजनौर, मई 22 -- ईद उल अजहा के करीब आते ही शहर की मस्जिदों में जुमे की नमाज से पहले कुर्बानी की अहमियत और उसकी फजीलत बयान की गई। उलेमा ने कहा कि कुर्बानी केवल जानवर जिबह करने का नाम नहीं, बल्कि अल्लाह की रजा के लिए अपनी चाहतों और मोह का त्याग करने का पैगाम है। शुक्रवार को शहर की चाहशीरी जामा मस्जिद, काजीपाड़ा मरकज वाली मस्जिद और अन्य प्रमुख मस्जिदों में बड़ी संख्या में नमाजी मौजूद रहे। उलेमा ने लोगों से ईद उल अजहा को सादगी, भाईचारे और जरूरतमंदों की मदद के जज्बे के साथ मनाने की अपील की। यह भी पढ़ें- ईद उल अजहा पर कोई भी नई परंपरा नहीं अपनाई जाएहजरत इब्राहिम की सुन्नत है कुर्बानी चाहशीरी जामा मस्जिद के इमाम मौलाना वरीस अहमद ने नमाजियों को खिताब करते हुए कहा कि कुर्बानी हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की उस महान सुन्नत की याद है, जिसमें उन्होंने अल्...
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