मेरठ, मई 25 -- नायब शहर काजी जैनुर राशिद्दीन सिद्दीकी ने जारी बयान में कहा कि इस्लाम में कुर्बानी हर उस मुस्लिम पर वाजिब है, जो साढ़े 52 तोले चांदी का मालिक हो अथवा रोजाना की जिंदगी की जरूरत की चीजों के अलावा साढ़े 52 तोला चांदी की कीमत का सामाने तिजारत (व्यापार) उसके पास हो। कुर्बानी के लिए बकरा, बकरी, भेड़, दुम्बा, दुम्बी, एक साल के हों। भैस दो साल की हो। भैस में सात आदमी हिस्सा ले सकते हैं। कानून की दृष्टि से प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी किसी भी सूरत में नहीं की जाएगी। कुर्बानी केवल तीन दिन तक हो सकती है। कुर्बानी ईद-उल-अजहा की नमाज से पहले करना दुरुस्त नहीं है। यह भी पढ़ें- ईद-उल-अजहा इंसान को कुर्बानी और इंसानियत का पैगाम देता है कहा कि ऐसे जानवरों की कुर्बानी नहीं की जा सकती, जो अंधा, काना, लंगड़ा, तिहाई से ज्यादा कान अथवा दुम कटी ह...