गोंडा, मई 24 -- मेहनौन, संवाददाता। ईद-उल-अजहा (बकरीद) का पर्व त्याग, समर्पण और इंसानियत की भावना का प्रतीक माना जाता है। यह त्योहार अल्लाह की राह में अपनी सबसे प्यारी चीज कुर्बान करने का पैगाम देता है। छोटी मस्जिद इटियाथोक के इमाम एवं इस्लामी विद्वान मुफ्ती यासिर ने कहा कि कुर्बानी केवल जानवर जिबह करने का नाम नहीं, बल्कि अल्लाह की रजा के लिए अपने अहंकार, लालच और मोह-माया को त्याग देने का संदेश है। उन्होंने बताया कि हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम को ख्वाब में अल्लाह का हुक्म मिला कि अपनी सबसे प्यारी और अनमोल चीज को उसकी राह में कुर्बान कर दें, अल्लाह के इस हुक्म को सिर आंखों पर रखते हुए उन्होंने अपने इकलौते बेटे हजरत इस्माईल अलैहिस्सलाम की कुर्बानी देने का फैसला किया। जब वह अपने बेटे को मीना की वादियों की ओर लेकर जा रहे थे, तब रास्ते में शैतान ...