ईको टूरिज्म की योजनाएं तो कई बनीं,पर सालों बाद भी सरजमीं पर नहीं उतर पाई हैं
जमुई, जून 10 -- झाझा। अरूण बोहरा/ निज संवाददाता बिहार के नागी और नकटी पक्षी अभयारण्यों को रामसर कन्वेंशन के तहत अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व के 81वें आर्द्रभूमि (वेटलैंड) के रूप में मान्यता प्रदान की गई है। बावजूद यहां पर्यटन क्षेत्र के रूप में इसे मूर्त रूप में नहीं दिया जा सका है। दोनों पक्षी अभयारण्य मानव निर्मित आर्द्रभूमि पर निर्मित हुए हैं। 7.91 हेक्टेयर में पसरी नागी एवं 3.32 हेक्टेयर में फैली नकटी,यानि कुल 11.23 हेक्टेयर में अपने पैर पसारे होने वाली उक्त दोनों झीलों को बाँधों के निर्माण के माध्यम से मुख्य व मूल रूप से सिंचाई उद्देश्यों के लिये विकसित किया हुआ है। जिसके जरिए झाझा जे अलावा गिद्धौर व लक्ष्मीपुर तक के इलाके के हजारों किसानों के खेतों की प्यास बुझाने का प्रयास किया जाता है। मौजूदा वक्त में भी सिंचाई सुविधा-संसाधनों को और विक...
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