नई दिल्ली, अप्रैल 30 -- सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एम्स की तरफ से दायर एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई करते हुए जोर देकर कहा कि किसी नाबालिग बच्ची को प्रेग्नेंसी जारी रखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है। साथ ही अदालत ने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार को भी फटकार लगाई और उससे 'मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी' (MTP) कानून में संशोधन करने का सुझाव दिया। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि बलात्कार पीड़िताओं, विशेषकर नाबालिगों के लिए गर्भपात की 20 या 24 सप्ताह की समय सीमा नहीं होनी चाहिए। ताकि उन्हें अपनी अनचाही प्रेग्नेंसी खत्म करने की इजाजत मिल सके। उच्चतम न्यायालय ने ये सारी बातें एम्स की तरफ से दायर उस सुधारात्मक याचिका पर फैसला सुनाते हुई कहीं, जिसमें उसने कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें अदालत ने 15 साल की एक लड़की को अपनी 30 सप्ता...
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