देहरादून, मई 18 -- तीन तलाक और हलाला जैसी कुप्रथाओं को रोकने को केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा सख्त कानून बनाए गए हैं। वहीं, इस्लाम एवं शरीयत भी इन कुप्रथाओं की पुरजोर मुखालफत करता है। रुड़की में समान नागरिक संहिता के तहत हलाला का पहला मामला दर्ज होने के बाद अब फिर इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। उलमा एवं मुस्लिम मामलों के जानकारों ने एक सुर में तीन तलाक को बड़ा गुनाह और योजनाबद्ध हलाला को हराम बताया है। उन्होंने चिंता जताई कि ऐसे चंद लोगों की वजह से पूरी कौम बदनाम होती है। इसलिए समाज को जागरूक होकर ऐसे गलत कार्यों के खिलाफ मुहिम छेड़नी चाहिए। तीन साल की सजा और एक लाख जुर्माना यह भी पढ़ें- हलाला केस में पीड़िता पर नया वार! परिवार साइबर अटैक का शिकार, फोन से सबूत मिटाएकानूनी प्रावधान अधिवक्ता शिवा वर्मा ने बताया कि यूसीसी के तहत हलाला जै...