प्रयागराज, जुलाई 13 -- Allahabad Highcourt: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि केवल इलेक्ट्रोहोम्योपैथी का प्रमाणपत्र रखने वाला व्यक्ति आधुनिक चिकित्सा पद्धति (एलोपैथी) का अभ्यास करने का अधिकार नहीं रखता। अदालत ने कहा कि बिना मान्यता प्राप्त योग्यता और विधिवत पंजीकरण के एलोपैथिक उपचार करना कानून के विरुद्ध है तथा ऐसे व्यक्ति को क्वैक (झोलाछाप) माना जाएगा, जिसे जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर एवं न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने एटा निवासी संतोष कुमार शर्मा की याचिका खारिज करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) द्वारा उनके अस्पताल को सील किए जाने के आदेश को बरकरार रखा। याची का दावा था कि उसने वर्ष 2005 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग से कम्युनिटी हेल्थ का व्यावसायिक प्रमाणपत्र ...