विधि संवाददाता, अगस्त 13 -- यूपी के इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले में सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि यौन उत्पीड़न जैसे संज्ञेय अपराध की शिकायत पर पुलिस केवल इस आधार पर एफआईआर दर्ज करने से इनकार नहीं कर सकती कि शिकायतकर्ता महिला ने व्हाट्सऐप चैट, कॉल रिकॉर्डिंग या अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराए हैं। पुलिस को शिकायत दर्ज कर निष्पक्ष जांच कर साक्ष्य जुटाने होते हैं। शिकायतकर्ता पर एफआईआर दर्ज कराने के चरण में ही सबूत जुटाने का बोझ नहीं डाला जा सकता। अगर महिला के पास सबूत नहीं भी हैं तो भी पुलिस को मामले में केस दर्ज करना होगा। न्यायमूर्ति चंद्र धारी सिंह और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने कंपनी के मालिक के खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़, डिजिटल पेनिट्रेशन और आपराधिक धमकी के आरोपों वाली एफआईआर रद...