उन्नाव, नवम्बर 16 -- उन्नाव। एक ओर जहां मिर्गी से पीड़ित लोगों को झाड़-फूंक से दूर रहने और चिकित्सकीय परामर्श लेने की सलाह दी जाती है, वहीं दूसरी ओर जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में मिर्गी रोगियों के उपचार के लिए न तो एमडी मेडिसिन विशेषज्ञ उपलब्ध हैं और न ही न्यूरोलॉजिस्ट। स्थिति यह है कि हर माह दर्जनों मरीज इलाज की आस में जिला अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन विशेषज्ञ न होने के कारण उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। मिर्गी (एपिलेप्सी) एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसमें मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाओं में असामान्य विद्युत गतिविधि होती है। इससे अचानक दौरे (सीजर) पड़ते हैं। कई बार मरीज की चेतना और मांसपेशियों पर नियंत्रण भी खत्म हो जाता है। आनुवंशिकता, सिर में चोट, संक्रमण, स्ट्रोक, ट्यूमर और मस्तिष्क विकास में असामान्यता इसके प्रमुख कारण है...