बलरामपुर, मार्च 10 -- उतरौला, संवाददाता। रमजान के पवित्र महीने का आखिरी अशरा शुरू हो गया है। यह अशरा रमजान के 21वें रोजे से लेकर 30वें रोजे तक चलता है। इस दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग अधिक से अधिक इबादत कर अल्लाह से रहमत, मगफिरत और जहन्नम से निजात की दुआ मांगते हैं। मौलाना व कारी नईमुद्दीन ने आखिरी अशरे की अहमियत बताते हुए कहा कि यह जहन्नम से मुक्ति का समय माना जाता है। इस अवधि में रोजेदार विशेष रूप से इबादत, तौबा और अल्लाह से माफी की दुआ करते हैं। उन्होंने बताया कि प्यारे नबी हजरत मोहम्मद भी इस अशरे में ज्यादा से ज्यादा इबादत करते थे और लोगों को भी इसकी प्रेरणा देते थे। आखिरी अशरा शुरू होते ही कई लोग मस्जिदों में एत्तकाफ बैठते हैं। एत्तकाफ 20वें रोजे की इफ्तार के बाद शुरू होकर ईद का चांद दिखाई देने तक जारी रहता है। इस दौरान एत्तकाफ में बै...
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