मुजफ्फर नगर, जनवरी 2 -- संसाधनों की कमी और शारीरिक अक्षमता किसी व्यक्ति के हौसले को कमजोर नहीं कर सकती। इसको सच साबित कर रहा है एक नेत्रहीन व्यक्ति, जो आज अपने हुनर और मेहनत से न केवल आत्मनिर्भर है, बल्कि अपने परिवार के सात सदस्यों का भरण-पोषण भी कर रहा है। यह कहानी है उस जज्बे की, जिसने अंधेरे को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी ताकत बनाया। मेरठ के जानी खुर्द निवासी रामबीर सैनी की आंखों की रोशनी महज सात साल की उम्र में एक गंभीर बीमारी के कारण चली गई थी। इतनी छोटी उम्र में दृष्टि का चले जाना किसी भी बच्चे और उसके परिवार के लिए गहरा सदमा होता है, लेकिन उसने हार नहीं मानी। इंटर तक पढाई करने के दौरान ही कुर्सी बनाने के अलावा फाइल,लिफाफे बनाना सीखा। परिवार का भरण पोषण शुरू ही किया था कि वर्ष 2007 में सरकारी नौकरी लग गई,उसमें भी कुर्सी बनाने का का...
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