इतिहास और भविष्य का संगम हमारा तिरंगा
नई दिल्ली, अगस्त 14 -- कुमार प्रशांत, वरिष्ठ पत्रकार जब मैं तिरंगे का मतलब खास कुछ नहीं समझता था, तब भी मुझे खुले आसमान में लहराता, हवा के साथ बल खाता तिरंगा बहुत आकर्षित करता था। सुंदर तो यह मुझे आज भी उतना ही लगता है, लेकिन अब 'सबसे सुंदर' जैसा भाव मन से निकल गया है। अब कहीं मन में यह भाव घर कर गया है कि सुंदरता झंडे में नहीं, उनके पीछे के हमारे मनोभाव में होती है। यह आज मन में इसलिए आया कि आसमान में तिरंगे को लहराने का दिन फिर से आ गया है। 15 अगस्त हमारी आजादी का दिन है। यह हमारे तिरंगे का दिन है, जब हम इसे खुले आसमान में भी और मन के आसमान में भी लहराते हैं। ऐसा क्या है इस तिरंगे में? सब कत्ल हो के तेरे मुकाबिल से आए हैं हम लोग सुर्खरू हैं कि मंजिल से आए हैं। तीन रंग की पट्टियों से हमने इसे बनाया है। कई धर्मों-जातियों के लोगों की शुभ भ...
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