आगरा, फरवरी 23 -- सत्यवीर की मेहनत को देखते हुए उसके चाचा इतिवारी लाल ने सत्यवीर को लोहे का काम सिखाया था, जिससे उसे रोजगार और परिवार चलाने में कोई दिक्कत नहीं आए। सत्यवीर को न केवल वेल्डिंग का अच्छा अनुभव हो गया था साथ में खराद मशीन पर काम करने में भी माहिर कारीगर बन चुका था। जब वह काम करने में परपक्क हो गया तो चाचा के सहयोग से अलग से दुकान करने लगा। बाद में वह गांव से पत्नी और बेटी को लेकर अमांपुर के एटा रोड पेट्रोल पंप से सटी दुकान और उसी में रहने की व्यवस्था कर परिवार के साथ बस गया। कासगंज और एटा रोड पर रहने के दौरान उसके पड़ोसी रहे लोगों ने बताया कि, चाचा इतिवारी ने सत्यवीर उर्फ फौजी को हुनरमंद बनाया। उसे खराद की मशीन खरीदने में भी सहयोग किया। इतिवारी अमांपुर में लोहे के कुशल कारीगरों में शुमार हैं, इसलिए कस्बा से उन पर लोहे से संबंध...