नई दिल्ली, अप्रैल 29 -- आज तक आपने अपने जीवन में आध्यात्मिक यात्रा करते हुए अनेकों सम्प्रदाओं के साधु-संतों, पीर पैगम्बरों के दर्शन किये होंगे। आज एक परिचय उस व्यक्तित्व से, जो हमारे बीच रहते हुए भी हम जैसा भोगी नहीं, बल्कि आत्मयोगी है। जिन्होंने अपने जीवन में संयम, साधना, तप और अहिंसा की पराकाष्ठा का स्पर्श किया है। साधक जीवन में पग रखते ही जिन्होंने जीवन पर्यंत सभी प्रकार के वाहनों का त्याग कर दिया। चाहे जेठ मास की धूप से संतप्त गर्म सड़कें हों अथवा पौष मास की शरीर को चीरती सर्द हवायें हों, जो नम्न बदन और नम्न कदमों से ही हजारों किलोमीटर की दूरी तय किया करते हैं। सम्पत्ति के नाम पर जिनके पास न सोना-चांदी हैं, न रुपया-पैसा और न ही हम आप की तरह मोबाईल लैपटॉप जैसे आधुनिक साधन, अगर उनके पास कुछ है तो एकमात्र मयूर पंख से बनी पिच्छिका और कमण्...