इटावा औरैया, फरवरी 17 -- हैंवरा कोठी पर हो रही श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन करते हुए उज्जैन स्थित महामृत्युंजय मठ महाकाल लोक के पीठाधीश्वर स्वामी प्रणवपुरी महाराज ने कहा कि ज्ञान प्राप्ति का सबसे बड़ा साधन संतों का संग है, जीव जब तक उनके चरणों की रज नहीं लेता, उसे तत्व ज्ञान नहीं हो सकता। ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए प्रणवपुरी महाराज ने कहा कि जहां सुनीति होती है, वहां ध्रुव जैसा भक्त पुत्र जन्म लेता है, और जहां सुरुचि यानी स्वेच्छाचारिता होती है, वहां दुष्ट संतान पैदा होती है। उन्होंने कहा कि उत्साहवर्धन को हतोत्साहित करना ही लक्ष्य प्राप्ति की ओर ले जाता है, जैसे बालक ध्रुव से जब नारद जी ने कहा कि तुम अभी बहुत छोटे हो, तपस्या नहीं कर पाओगे, तो ध्रुव ने उसे चुनौती के रूप में लेते हुए कठोर तपस्या की और भगवान के दर्शन पाए और वह ध्रुव जिन्...