इटावा औरैया, अगस्त 28 -- भाद्र शुक्ल पंचमी से जैन समाज का दस दिवसीय दशलक्षण पर्व गुरुवार को श्रद्धा और उत्साह के साथ प्रारंभ हुआ। नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में सुबह प्रभात फेरी के साथ कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। प्रथम दिन का विषय उत्तम क्षमा धर्म रहा। प्रभात फेरी के बाद सामूहिक अभिषेक और शांतिधारा का आयोजन किया गया। शांतिधारा का सौभाग्य राजकलम चिराग जैन परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर सांगानेर से पधारे शास्त्री श्रेयांश जैन ने प्रवचन देते हुए कहा कि क्षमा का जन्म तभी होता है जब मनुष्य के भीतर कषाय यानी क्रोध, मान, माया और लोभ की मंदता आती है। उन्होंने बताया कि क्षमा धर्म आत्मा को शुद्धि की ओर अग्रसर करता है। शास्त्री जी ने स्व-क्षमा और पर-क्षमा के महत्व को स्पष्ट करते हुए कहा कि अपने अपराधों का आत्ममंथन कर क्षमा मांगना और द...