नई दिल्ली, सितम्बर 22 -- बच्चा खेलना छोड़ दे और रोने लग जाए, तो मां को अपना सब काम छोड़कर उसके पास आना पड़ता है। उसे गोद में बैठाकर दुलारना पड़ता है, परंतु यदि बच्चा खेल में लगा रहे, तो मां निश्चिंत रहती है। इसी प्रकार यदि हम भगवान के लिए व्याकुल न होकर सांसारिक वस्तुओं में ही प्रसन्न रहते हैं, तो भगवान निश्चिंत रहते हैं और हमसे मिलने नहीं आते। यदि बच्चा लगातार रोने लग जाए और मां के बिना किसी भी वस्तु से प्रसन्न न हो, तो घर के सभी लोग बच्चे के पक्ष में हो जाते हैं और उसकी मां को कहते हैं- 'बच्चा रो रहा है और तुम काम में लगी हो! जल्दी बच्चे को गोद में ले लो।' उस समय मां कितना ही आवश्यक कार्य क्यों न कर रही हो, बच्चे के रोने के आगे उस कार्य का कोई मूल्य नहीं रहता। यह भी पढ़ें- पितृपक्ष का पहला दिन कब है और कब तक रहेंगे? जान लें सभी श्राद्ध ...