नई दिल्ली, अगस्त 3 -- सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि इंसान की गरिमा जीवन का एक अहम हिस्सा है। मोटर दुर्घटना मुआवजे से जुड़े कानूनों के तहत, ऐसे मामले जिनमें बच्चे स्थायी या लगभग पूरी तरह से विकलांग हो जाते हैं, उन्हें एक अलग और खास श्रेणी में रखा जाता है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में मुआवजा तय करते समय अदालतों को यह ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे की न केवल शारीरिक क्षमता छिन गई है, बल्कि उसका पूरा भविष्य भी प्रभावित हुआ है। ये बातें जस्टिस उज्जल भुइयां और एन.वी. अंजारिया की पीठ ने कही। पीठ ने एक बच्चे को मिलने वाले मुआवजे को 45.40 लाख रुपये से बढ़ाकर 83.38 लाख रुपये कर दिया। इस बच्चे को सड़क दुर्घटना में रीढ़ की हड्डी और तंत्रिका तंत्र (न्यूरोलॉजिकल) में गंभीर चोटें आई थीं।पीठ ने गौर किया कि जून 2015 में जब दुर्घटना हुई, तब बच्चा सिर्फ छह...