नई दिल्ली, जून 12 -- दुख एक चक्र की तरह आता है और इसे चटाई की तरह समेटा नहीं जा सकता... ये शब्द देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के थे, जो उन्होंने 1977 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद अपने करीबी सहयोगियों द्वारा पाला बदलने पर कहे थे। उनकी जीवनी लिखने वाली पुपुल जयकर ने इंदिरा के इस गहरे दर्द को दर्ज किया था। उस समय आपातकाल के बाद देश में जनता पार्टी की लहर थी और कांग्रेस के बड़े-बड़े दिग्गजों ने मान लिया था कि इंदिरा गांधी का राजनीतिक करियर अब हमेशा के लिए खत्म हो चुका है। ऐसा ही कुछ उनके विरोधियों ने साल 1969 में भी सोचा था। आज साल 2026 में इंदिरा गांधी के जीवन के ये दो किस्से अचानक भारतीय राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। वजह है पश्चिम बंगाल की सियासत में आया भूचाल। इन दिनों राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पश्चिम...