हिन्दुस्तान, मार्च 12 -- सुप्रीम कोर्ट के इच्छामृत्यु के आदेश देने के बाद मीडिया से बात करने के दौरान हरीश राणा के पिता कई बार भावुक हुए। उन्होंने अपनी आवाज को ऊंचा करके दर्द को छिपाने की कोशिश भी की, मगर दर्द इतना था कि आंसू छलक आए। रुंधे गले से बोले, बेटे को इंजीनियर बनाने का सपना अधूरा रह गया। हरीश के साथ हुए एक हादसे ने पूरे परिवार के सपने छीन लिए।कई प्रतियोगिताएं भी जीतीं थी 'लाइव हिन्दुस्तान' से हुई बातचीत के दौरान हरीश के मां और पिता दोनों की आंखें कई बार छलक आईं। हरीश के पिता अशोक राणा ने बताया कि बेटा बचपन से ही पढ़ने में बहुत होशियार रहा। कई प्रतियोगिताएं भी उसने जीतीं थी। उन्होंने बताया कि हरीश सिविल इंजीनियर बनने की तैयारी कर रहा था। हर साल एक लाख रुपये कॉलेज की फीस और 60 हजार हॉस्टल की फीस जमा कर रहे थे।कुदरत को कुछ और ही मंज...