जमशेदपुर, अगस्त 14 -- 12 जुलाई 2019 को इंजीनियर आयुष अपना 18वां जन्मदिन मना रहे थे। तभी पता चला कि उनके पिता पप्पू सिंह लीवर सिरोसिस से जूझ रहे हैं और लीवर ट्रांसप्लांट ही उन्हें बचा सकता है। आयुष ने तत्काल पिता को लीवर दान करने का फैसला लिया और बेंगलुरु पहुंच गए। जांच में उपयुक्त पाए जाने और झारखंड-कर्नाटक सरकार की अनुमति के बाद पिता-पुत्र का ऑपरेशन हुआ। दोनों करीब एक महीने अस्पताल में रहे। इस दौरान पिता को चार बार हार्ट अटैक भी आया, लेकिन इलाज के बाद वह बच गए। आज 60 वर्षीय पप्पू सिंह सामान्य जीवन जीते हुए व्यवसाय कर रहे हैं। आयुष भी पूरी तरह स्वस्थ हैं और इंजीनियरिंग के बाद बेंगलुरु में मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहे हैं। यह भी पढ़ें- अंगों की कमी ही नहीं, परिवार का फैसला और सिस्टम भी बड़ी चुनौतीअन्य प्रेरणादायक कहानियां पप्पू ने बताया कि उन...