नई दिल्ली, मई 31 -- पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी सरकार ने पशु वध नियंत्रण अधिनियम 1950 को सख्ती से लागू किए जाने के बाद गौहत्या का मुद्दा एक बार फिर पूरे देश में सियासी और धार्मिक बहस का केंद्र बन गया है। इस कानून के प्रावधानों के अनुसार, 14 वर्ष से अधिक आयु के किसी भी पशु का वध केवल स्थानीय अधिकारियों और सरकारी पशु चिकित्सकों के लिखित अनिवार्य प्रमाणीकरण के बाद ही संभव है। इस फरमान के बाद न केवल पश्चिम बंगाल बल्कि पूरे देश में राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। विपक्षी दलों ने इसे 'हिंदुत्व एजेंडे' का हिस्सा बताते हुए आलोचना की है, जबकि भाजपा ने इसे पशु क्रूरता रोकने और हिंदू भावनाओं का सम्मान करने का कदम बताया है। इस मुद्दे पर देशव्यापी चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी और अजमेर शरीफ द...