बोकारो, नवम्बर 10 -- कसमार प्रखंड में पिछले कई साल से आवारा व छुट्टा पशुओं की मनमानी चल रही है, जिससे किसान अब खेती किसानी से नाता तोड़ रहे हैं। खासकर धान की खेती, जो किसानों की आजीविका के लिए अत्यंत जरूरी है, उससे भी लोग मुंह मोड़ रहे हैं। दिनोंदिन बीज से लेकर उर्वरक के दाम में बेतहाशा वृद्धि के बाद मॉनसून की मार से अब धान की खेती मुनाफे की खेती ऐसे भी नहीं रही। बावजूद कसमार समेत आसपास के प्रखंड के किसान आज भी धान की खेती करते रहे हैं। इधर कसमार समेत गर्री, तेलमुंगा, मोचरो में इस वर्ष लगभग 200 से अधिक किसानों ने धान की खेती करना बंद कर दिया है। इसका प्रमुख कारण आवारा पशुओं द्वारा फसलों की बर्बादी बताया जा रहा है। इस संदर्भ में गर्री अंजुमन कमेटी के पूर्व सदर व समाजसेवी शेखावत अंसारी का कहना है कि चाहे मॉनसून की मार हो या खाद बीज के दाम में...
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