नई दिल्ली, मई 21 -- नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब भारत में दवाइयों की कीमतों पर भी दिख सकता है। केंद्र सरकार 384 आवश्यक और जीवन रक्षक दवाओं की कीमतों में एक बार की 'आपातकालीन बढ़ोतरी' करने पर विचार कर रही है। यह अस्थायी बढ़ोतरी होगी। वजह यह है कि युद्ध के कारण दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल और रसायनों की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे उत्पादन लागत तेजी से बढ़ गई है। सरकारी अधिकारियों और दवा उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक इस मुद्दे पर राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए), फार्मास्यूटिकल्स विभाग और वाणिज्य मंत्रालय के बीच चर्चा चल रही है। राहत की बात यह है कि सरकार इस बढ़ोतरी को स्थायी नहीं रखेगी। जैसे ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में हालात सुधरेंगे और आपूर्ति सामान्य होगी को बढ़ी हुई कीमतों को वापस ले...