फरीदाबाद, फरवरी 14 -- फरीदाबाद। आर्मेनिया की हस्तशिल्प कला अपनी प्राचीन परंपराओं, सूक्ष्म कारीगरी और सांस्कृतिक गहराई के लिए विश्वभर में पहचान रखती है। दक्षिण काकेशस क्षेत्र में स्थित आर्मेनिया की यह कला केवल सजावट का माध्यम नहीं, बल्कि उसकी ऐतिहासिक स्मृतियों और आध्यात्मिक विश्वासों का जीवंत प्रतीक है। पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होती आ रही यह परंपरा आज भी उतनी ही जीवंत है जितनी सदियों पहले थी।आर्मेनियाई शिल्पकला की सबसे विशिष्ट पहचान खचकार यानी क्रॉस-पत्थर हैं। पत्थरों पर उकेरी गई जटिल नक्काशी में क्रॉस, पुष्प आकृतियां और ज्यामितीय डिजाइन बनाए जाते हैं। ये खचकार धार्मिक आस्था के प्रतीक होने के साथ-साथ स्मारक के रूप में भी स्थापित किए जाते हैं। पत्थर की नक्काशी में दिखाई देने वाली बारीकी शिल्पकारों की उच्च दक्षता को दर्शाती है। पारंपरिक का...
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