आर्कटिक की बर्फ पिघलने से मानसून पर सर्वाधिक प्रतिकूल असर
नई दिल्ली, अगस्त 22 -- देश में आने वाले दशकों में जलवायु खतरा कहीं ज्यादा गंभीर रूप धारण कर सकता है। सबसे ज्यादा खतरा मानसून के प्रभावित होने को लेकर व्यक्त किया जा रहा। हाल में आर्कटिक को लेकर संसद में पेश की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि 2040 तक वहां गर्मियों में समुद्र की बर्फ खत्म हो जाएगी। इससे मानसून पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने के साथ चरम मौसमी घटनाएं भी बढ़ सकती हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्कटिक में गर्मी बढ़ रही है। इससे वहां की बर्फ 13 फीसदी सालाना की रफ्तार से नष्ट हो रही। जमी बर्फ के पिघलने से कार्बन और मीर्थन उत्सर्जन भी बढ़ रहा जिससे तापमान वृद्धि होती है। नतीजा यह है कि यह स्थिति मौसमी धाराओं जेट स्ट्रीम के साथ-साथ वायुमंडलीय परिवर्तनों को भी प्रभावित कर रही है। आर्कटिक की समुद्री बर्फ और हिमालय तंत्र के बीच खासकर ग्रीष्मका...
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