आर्कटिक की बर्फ पिघलने से आएगी आफत, मूसलाधार बारिश के बाद चरम पर पहुंच जाएगी ठंड
नई दिल्ली, अगस्त 24 -- मदन जैड़ा। भारत में आने वाले दशकों में जलवायु खतरा ज्यादा गंभीर रूप धारण कर सकता है। आर्कटिक की बर्फ पिघलने से भारत समेत कई देश में असमय बाढ़-बारिश का खतरा है। मानसून के प्रभावित होने को लेकर सबसे ज्यादा खतरा जताया जा रहा है। हाल में आर्कटिक को लेकर संसद में पेश रिपोर्ट में कहा गया कि 2040 तक वहां गर्मियों में समुद्र की बर्फ खत्म हो जाएगी। इससे मानसून पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने के साथ चरम मौसमी घटनाएं भी बढ़ सकती हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्कटिक में गर्मी बढ़ रही है, जिससे 13 फीसदी सालाना की रफ्तार से बर्फ नष्ट हो रही है। बर्फ के पिघलने से कार्बन-मीर्थन उत्सर्जन भी बढ़ रहा, जिससे तापमान में वृद्धि हो रही है। आर्कटिक की बर्फ और हिमालय तंत्र के बीच ग्रीष्मकालीन मानसून को लेकर गहरा संबंध है। आर्कटिक के कारा सागर मे...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.