नई दिल्ली, जून 5 -- फैजान मुस्तफा,कुलपति, चाणक्य राष्ट्रीय विधि विवि नागरिकता वास्तव में किसी व्यक्ति और राजनीतिक समुदाय के बीच का संबंध है, पर क्योंकि आज, नागरिकता की आधुनिक अवधारणा में 'बाहरी' लोगों को बाहर रखना महत्वपूर्ण हो गया है, इसीलिए वसुधैव कुटुंबकम की प्राचीन भारतीय अवधारणा नागरिकता की संकल्पना से मेल नहीं खाती। क्या नागरिकता के मुद्दे को इस प्रकार सुलझाया जाना चाहिए कि हमारे अपने ही लोग विदेशी घोषित कर दिए जाएं या आजीविका या कल्याणकारी योजनाओं से वे वंचित कर दिए जाएं? यह आज का सबसे गंभीर सवाल है। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद कई राज्य सरकारों ने उन लोगों को कल्याणकारी योजनाओं से बाहर करना शुरू कर दिया है, जिनके नाम एसआईआर सूची में शामिल नहीं हैं। बिहार एसआईआर से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला सुनाया, वह विधि सम...