लखनऊ, मार्च 6 -- लखनऊ, संवाददाता।राजकीय आयुर्वेद, होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों व डिस्पेंसरियों में मरीजों को आधी अधूरी दवाएं देकर लौटाया जा रहा है। ज्यादातर मरीज बाजार से दवाएं खरीदने को मजबूर हैं। बजट के अभाव में दवाओं की खरीद-फरोख्त ठप है।प्रदेश में आठ राजकीय आयुर्वेदिक और 10 होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज तथा दो हजार से अधिक आयुर्वेदिक और 1500 से अधिक होम्योपैथिक डिस्पेंसरी हैं। डॉक्टर पर्चे पर यदि पांच प्रकार की दवा लिख रहे हैं तो उसमें से एक या दो तरह की दवाएं ही मरीजों को मिल पा रही हैं।अनुरक्षण का भी बजट नहीं मिलामेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों ने काफी समय से दवाओं और बिल्डिंग की मरम्मत के लिए बजट मांगा। आयुष विभाग की ओर से दवाओं और अनुरक्षण के लिए बजट नहीं मिला है।कुछ जगह पहुंचा आधा अधूरा बजटआयुष विभाग की ओर से प्रदेश के कुछ आयुर्वेदिक मेडि...