नई दिल्ली, सितम्बर 24 -- चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों का सार्वजनिक होना कोई नई बात नहीं है। आयोग के बहुसदस्यीय निकाय बनने के बाद से ही अलग-अलग मौकों पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच अधिकारों और कामकाज को लेकर मतभेद सामने आते रहे हैं। इसकी शुरुआत 1989 से मानी जाती है।1989 में पहली बार बना बहुसदस्यीय आयोग अक्टूबर 1989 में एसएस धनाओ और वीएस सीगल को चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया। उस समय आरवीएस पेरी शास्त्री मुख्य चुनाव आयुक्त थे। शास्त्री ने सार्वजनिक तौर पर इस व्यवस्था को लेकर कुछ नहीं कहा, लेकिन व्यापक रूप से माना गया कि उन्हें आयोग में दो नए सदस्यों की नियुक्ति से अपने अधिकारों में कमी महसूस हुई थी। जनवरी 1990 तक दोनों चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति रद्द कर दी गई और चुनाव आयोग फिर से एक सदस्यीय निकाय बन गया।टीएन शेषन के ...