मऊ, मार्च 3 -- मऊ, संवाददाता। जनपद में आम के गुणवत्तायुक्त उत्पादन के लिए कीट एवं रोगों का उचित समय प्रबन्धन नितांत आवश्यक है। क्योकि बौर निकलने से लेकर फल लगने तक की अवस्था अत्यन्त ही संवेदनशील होती है। वर्तमान में आम की फसल को मुख्य रूप से भुनगा एवं मिज कीट तथा खर्रा रोग से क्षति पहुंचने की सम्भावना रहती है। बागवानों को यह भी सलाह दी जाती है कि बागों में जब बौर पूर्ण रूप से खिला हो तो उस अवस्था में कम से कम रासायनिक दवाओं का छिड़काव किया जाए, जिससे पर-परागण क्रिया प्रभावित न हो सके। कृषि विज्ञान केन्द्र पिलखी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा.विनय कुमार सिंह ने बताया कि आम के बागों में भुनगा कीट कोमल पत्तियों एवं छोटे फलों के रस चूसकर हानि पहुंचाते हैं। प्रभावित भाग सूखकर गिर जाता है। साथ ही यह कीट मधु की तरह का पदार्थ भी विसर्जित करता है, जिससे पत...