मेरठ, मई 6 -- विश्व अस्थमा दिवस पर पल्मोनेालॉजिस्ट डॉ. अमित अग्रवाल ने मंगलवार को वार्ता में बताया कि आप अस्थमा को नियंत्रित कर सकते हैं। इस वर्ष की थीम है। थीम मरीज सशक्तिकरण पर जोर देती है। नियंत्रण करने के लिए रोजाना दवाएं लेना, धूल के कण, धुआं, प्रदूषण जैसे ट्रिगर्स से बचना, सार्वजनिक रूप से इनहेलर इस्तेमाल करने में कभी शर्म महसूस न करना है। नियंत्रण की शुरुआत पहचान से होती है। यदि हम 12 साल की उम्र से पहले अस्थमा पहचान लें, तो आजीवन जटिलताओं को रोक सकते हैं। रात में खांसी या उसे अस्थमा हो सकता है। खेलते समय सांस फूलने वाला बच्चा 'कमजोर' नहीं है। यह भी पढ़ें- अस्थमा और प्रदूषित हवा: क्या इलाज हर मरीज तक पहुंच रहा है? इनहेलर सीरप से ज्यादा सुरक्षित हैं। स्पेसर के साथ लेने से दवा का असर 50 फीसदी तक बढ़ जाता है। इस अभियान के माध्यम से मे...