नई दिल्ली, दिसम्बर 17 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। दिल्ली उच्च न्यायालय ने आपसी सहमति से तलाक को लेकर एक अहम और स्पष्ट करने वाला फैसला सुनाया है। पूर्ण पीठ ने कहा है कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13बी(1) के तहत तलाक की पहली अर्जी दाखिल करने से पहले एक वर्ष की अलगाव अवधि हर हाल में अनिवार्य नहीं है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उपयुक्त मामलों में इस अवधि को अधिनियम की धारा 14(1) के प्रावधानों के तहत माफ किया जा सकता है। न्यायमूर्ति नवीन चावला, न्यायमूर्ति अनुप जयराम भंभानी और न्यायमूर्ति रेणु भटनागर की पीठ ने यह भी कहा कि एक वर्ष की अवधि की माफी, धारा 13बी(2) के तहत दूसरी अर्जी के लिए निर्धारित छह महीने की अवधि की माफी को प्रभावित नहीं करती। दोनों अवधियों पर अदालत स्वतंत्र और अलग-अलग रूप से विचार कर सकती है। यदि अदालत यह निष्कर्ष निकालती...