विधि संवाददाता, अप्रैल 20 -- यूपी के इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि केवल आपराधिक मामले में बरी होने के आधार पर किसी सरकारी कर्मचारी को स्वतः सेवा में बहाल नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि यदि विभागीय जांच में आरोप सिद्ध होते हैं, तो ऐसी कार्रवाई बरकरार रह सकती है, भले ही आपराधिक मुकदमे में अभियुक्त को राहत मिल गई हो। पुलिस कांस्टेबल कुंवर पाल सिंह की याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि आपराधिक मुकदमा और विभागीय कार्यवाही अलग-अलग दायरे में चलते हैं और दोनों के मानक भी भिन्न होते हैं। यूपी के फिरोजाबाद से जुड़े एक मामले में सुनवाई करते हुए न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दोनों कार्यवाहियों में आरोप, साक्ष्य और गवाह समान हों...