मिर्जापुर, मार्च 14 -- मिर्जापुर। जब-जब प्रकृति ने मानव को चुनौती दी, तब-तब समाज ने अपने भीतर से ऐसे लोगों को जन्म दिया, जो संकट में मदद के लिए आगे आए। अब वही भूमिका 'आपदा मित्र' निभा रहे हैं। बाढ़, आग, सड़क हादसा या बड़े धार्मिक आयोजन- हर संकट में प्रशिक्षित स्वयंसेवक प्रशासन के साथ मिलकर राहत और बचाव की जिम्मेदारी उठाते हैं। विडंबना है कि समाज की रक्षा में जुटे इन स्वयंसेवकों को अब तक स्थायी पहचान, सामाजिक सुरक्षा, पर्याप्त बीमा और नियमित आय जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। वे चाहते हैं कि उनके योगदान के अनुरूप सम्मान, सुरक्षा मिले। प्राकृतिक आपदाओं से जूझते समाज में जब भी संकट की घड़ी आती है तो सबसे पहले जो लोग राहत और बचाव के लिए मैदान में उतरते हैं, उन्हें 'आपदा मित्र' कहा जाता है। बाढ़, आग, भूकंप, सड़क दुर्घटना या...