नई दिल्ली, अक्टूबर 7 -- किसी दस साल के बच्चे से पेरू की राजधानी पूछिए, तो अगर न जानता हो तो संभव है कि वह तुरंत किसी वॉयस असिस्टेंट से पूछ कर जवाब दे दे। गणित के किसी सवाल में अटक जाए तो किसी चैटबॉट की मदद लेकर तुरंत सॉल्व कर दे। यहां तक कि बच्चा अगला कौन-सा वीडियो देखेगा, कौन-सा गेम खेलेगा या कौन-सा गाना सुनेगा, इसका चुनाव भी अक्सर किसी ऐसे एल्गोरिदम के जरिए होता है, जिसके बारे में उसे जानकारी तक नहीं होती। लेकिन अगर उसी बच्चे से पूछा जाए कि AI ने वह जवाब या सुझाव कैसे चुना, तो अधिकांश बच्चे इसका उत्तर शायद ही दे पाएं। इसकी वजह बच्चों की क्षमता नहीं, बल्कि यह है कि उन्हें अब तक यह समझाया ही नहीं गया कि AI काम कैसे करता है। यही वह अंतर है जिसे समझ कर भरने की जरूरत है। बच्चे AI का इस्तेमाल करना तो सीख रहे हैं, लेकिन उसे समझना और उसके जवाब ...