देवरिया, सितम्बर 5 -- देवरिया, निज संवाददाता। आधुनिक व तकनीकी पढ़ाई के दौर में धीरे-धीरे गुरु शिष्य परम्परा कमजोर होती जा रही है। ऐसे में आधुनिक शिक्षा के साथ जेन जी व जेन अल्फा को नैतिक शिक्षा का पाठ जरूरी है। स्कूलों में इन पीढ़ियों को तकनीक आधारित शिक्षा दी जा रही है। शिक्षा में तकनीक का दखल बढ़ने के साथ शिक्षक और छात्र के बीच एक अघोषित दूरी भी बन रही है। अभिभावक भी अपनी भूमिका से कुछ हद तक दूर हो गए हैं। यह भी पढ़ें- व्यवसायीक्करण से कमजोर हो रही गुरु शिष्य परंपराशिक्षा में बदलाव ऐसे में छात्रों में स्वेच्छाचारिता बढ़ रही है। सकारात्मक शिक्षा की जगह बाजारी शिक्षा के बढ़ते प्रभाव से मानवीय संवेदनाएं प्रभावित हो रही हैं। आने वाली पीढ़ी में केवल अपने हित के बारे में सोचने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। इससे समाज की महत्वपूर्ण कड़ियां कमजोर हो ...