गाजीपुर, फरवरी 16 -- गाजीपुर। आर्य समाज मंदिर चीतनाथ पर ऋषि दयानंद बोधोत्सव यज्ञ किया गया। डीएवी इंटर कॉलेज गाजीपुर के आचार्य डॉ. संतोष कुमार तिवारी ने कहा कि मूलशंकर से दयानंद सरस्वती बनने की कहानी प्रारंभ होती है। शिवरात्रि की उस घटना से जिसमें शिवलिंग पर चढ़े हुए प्रसाद को चूहों द्वारा खाया जा रहा था। यहीं से बालक मूल शंकर के मस्तिष्क में ईश्वर के मूल स्वरूप को जानने की जिज्ञासा उत्पन्न हुई और उन्होंने घर छोड़ दिया और पूर्णतः ब्रह्मचारी रहने का संकल्प लिया। पूर्णानंद सरस्वती से संन्यास की दीक्षा ली, फिर मथुरा में दंडी स्वामी विरजानंद सरस्वती से ज्ञान की प्राप्ति किया। आध्यात्मिक प्रवक्ता माधव कृष्ण ने कहा कि दयानंद आधुनिक भारत के चिंतक तथा आर्य समाज के संस्थापक थे। उन्होंने' 'वेदों की ओर लौटो' का प्रसिद्ध नारा दिया। उन्होंने कर्म सिद्ध...