संतकबीरनगर, जनवरी 21 -- संतकबीरनगर, हिन्दुस्तान टीम। संतकबीरनगर जिले के ग्राम पंचायतों में नियुक्त सचिवों और ग्रामीण क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्रों के अधीक्षक की नींद आदेश से खुल रही है। इसका खामियाजा जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने वालों को भुगतना पड़ रहा है। सीआरएस पोर्टल पर अभी तक सचिवों ने सूचना देने वाले ग्राम पंचायत स्तर के नामित सूचकों का नाम तक नहीं दर्ज किया है। इतना हीं नहीं यदि सचिव और अधीक्षक के स्तर से पोर्टल पर 21 दिन में जन्म और मृत्यु की सूचना दर्ज कर दी जाती तो प्रमाण पत्र जारी होने में देरी न होती। ऐसा नहीं करने की वजह से एक माह से अधिक और एक साल तक बिलंब वाले दो हजार से अधिक मामले जिला मुख्यालय पर डीपीआरओ के लॉगिंग पर पहुंचे है। जिसमें से 245 मामले अभी भी लंबित है। शासन स्तर से 1969 में जन्म-मृत्यु अधिनियम लागू हुआ था और ...