जमशेदपुर, जुलाई 30 -- कॉलेजों में उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए आदिवासी छात्र नहीं मिल रहे हैं। स्थिति यह है कि शहरी इलाकों के अधिकांश कॉलेजों में स्नातक पाठ्यक्रमों में एसटी के लिए निर्धारित 26 प्रतिशत और एससी के लिए 10 प्रतिशत आरक्षित सीटें विद्यार्थियों के अभाव में खाली रह जा रही हैं। इन आरक्षित सीटों को भरने के लिए इस बार कॉलेजों को चार वर्षीय स्नातक में दाखिला लेने के लिए तीसरी और चौथी मेरिट लिस्ट जारी करनी पड़ रही हैं। इसके बाद बाध्य होकर ये सीटें सामान्य कोटि के विद्यार्थियों से भरनी पड़ रही हैं।  इस शैक्षणिक संकट की बानगी जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय में साफ देखी जा सकती है, जहां अंग्रेजी मेजर के साथ इतिहास, राजनीति विज्ञान और कॉमर्स जैसे लोकप्रिय विषयों की आरक्षित सीटें छात्राओं के नहीं मिलने से सामान्य वर्ग की छात्राओं से भरनी प...