जमशेदपुर, जुलाई 20 -- संताल आदिवासियों के पारंपरिक परिधान पंछी साड़ी-काचा धोती को देश भर में झारखंड की पारंपरिक विरासत के रूप में बड़ी पहचान मिली है। राज्य के पारंपरिक उत्पाद के रूप में इसे भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्रदान किया गया है, जिससे इस उत्पाद को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। गौरतलब हो कि जीआई टैग किसी उत्पाद की विशिष्ट भौगोलिक पहचान, गुणवत्ता और प्रामाणिकता को कानूनी मान्यता देता है, जिससे उसकी ब्रांड वैल्यू बढ़ती है और नकली उत्पादों पर रोक लगाने में मदद मिलती है। पिछले दिनों झारखंड के कुल 11 आदिवासी आधारित उत्पादों को जीआई टैग मिला है उनमें पांची साड़ी-काचा धोती एवं फैब्रिक समेत कुचाई सिल्क, कोडरमा का केसरिया कलाकंद, डोकरा क्राफ्ट, दुमका चादर एवं बडोनी पपेट्स, मुंडा ज्वेलरी, झारखंड बांस शिल्प, तसर सिल्क एवं...