हजारीबाग, अगस्त 8 -- खपरैल घर से शुरू हुई मार्शल बुनकर समिति किस्सा कजरी कॉटन का चुरचू हजारीबाग प्रतिनिधि । हजारीबाग जिले के चुरचू प्रखंड अंतर्गत बहेरा पंचायत के कजरी गांव स्थित भुरकुंडा टोला के संथाल आदिवासी युवा सुरेश मुर्मू की मेहनत और दृढ़ संकल्प ने एक स्थानीय पहल को राष्ट्रीय पहचान दिला दी है। 21 नवंबर 2012 को शुरू हुई यह कहानी आज झारखंड के आदिवासी समाज के लिए एक मिसाल बन चुकी है। सुरेश द्वारा गठित मार्शल प्राथमिक बुनकर सहयोग समिति की शुरुआत एक साधारण खपरैल घर से मात्र 13 सदस्यों दस महिला और तीन पुरुष के साथ हुई थी। शुरुआती दिनों में समिति ने बैंक से ऋण लेकर सात हैंडलूम, चार चरखी और 1 धागा घुमाने वाला ड्रम प्राप्त किया। अपनी मेहनत के बल पर समिति ने पहले ही वित्तीय वर्ष 2014-2015 में 75,000 रुपये का टर्नओवर हासिल किया। इसके बाद कॉटन म...