रिषिकेष, अप्रैल 22 -- कथा मर्मज्ञ रमेश उनियाल ने कहा कि वास्तव में, आत्म-संयम ही वह आधारशिला है, जिस पर एक सुदृढ़, नैतिक और संतुलित समाज की रचना सम्भव है। संयम व्यक्ति के आंतरिक बल, विवेक और प्रज्ञा को जागृत करता है, जिससे उसका जीवन निरन्तर पवित्रता और श्रेष्ठता की दिशा में आगे बढ़ता है। बुधवार को कौटिल्य वाटिका वैडिंग प्वाइंट प्रतीतनगर में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के दूसरे दिन आचार्य रमेश उनियाल ने कहा कि आत्म-संयम केवल बाह्य आचरण का नियंत्रण नहीं, बल्कि यह अन्तःकरण में स्थित समस्त विकारों एवं दुर्बलताओं का निराकरण है। जो व्यक्ति आत्म-संयम से युक्त होता है, उसके मन में सदाचार, विनम्रता, दया, सत्य तथा अहिंसा जैसे दिव्य गुण स्वतः प्रस्फुटित होते हैं। यह भी पढ़ें- सत्य से मिलती है आत्मिक शांति और ईश्वर: उनियाल जब व्यक्ति प्राकृतिक नियमों, सद...
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