आत्म प्रक्षालन के माध्यम से होते हैं कर्म प्रक्षालन : भाव भूषण
मेरठ, जून 9 -- श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के त्रिमूर्ति जिनालय में चल रहे श्री शांतिनाथ महामंडल विधान में 20वें दिन 110 परिवारों ने भाग लिया और मुख्य वेदी पर विराजमान भगवान शांतिनाथ के समक्ष भक्तों ने भाव पूर्वक भक्ति की। विधान की शुरुआत प्रात: मुख्य वेदी पर विराजमान भगवान श्री शांतिनाथ के जलाभिषेक के साथ हुई। तत्पश्चात भगवान की शांतिधारा राजीव जैन, सारिका जैन, अरनव जैन, आयुष जैन ने की। विधान के मध्य धर्मसभा में आचार्य भाव भूषण महाराज ने कहा कि भगवान श्री ऋषभ देव के पश्चात 23 तीर्थंकरों ने भी श्रमण संस्कृति के दीप जलाए रखे हैं। हजारों श्रमण मुनियों ने इस संस्कृति को गौरवान्वित किया है। उन्होंने बताया कि शांतिनाथ विधान से आत्म प्रक्षालन की प्रक्रिया शुरू होती है। आत्म प्रक्षालन के माध्यम से कर्म प्रक्षालित होते है। सायंकाल मे संगीत...
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