ब्रह्मा कुमारी चक्रधारी दीदी, मई 26 -- सदियों से यही कहा गया है कि अपने आपको जानो, अपने आपको पहचानो। बाहरी रूप से हम अपने आपको बहुत अच्छी तरह जानते हैं। आत्मा के बारे में यही माना जाता है कि वह शरीर में एक चैतन्य शक्ति है, जो शरीर को चला रही है। शरीर हड्डी-मांस का एक पिंजड़ा है। जब आत्मा इस शरीर को छोड़ देती है, तब शरीर मृत हो जाता है। आत्मा अजर-अमर-अविनाशी शक्ति है। आत्मा का कभी विनाश नहीं होता। यह सारा ज्ञान तो हमारे पास है, फिर जानने के लिए शेष क्या बचा है? मनुष्य कई बार यह सोचता है कि हमारे जीवन में आत्मा के ज्ञान की क्या आवश्यकता है? क्या आत्मज्ञान की या आध्यात्मिकता की इस आधुनिक जीवनशैली में कोई उपयोगिता है? कोई प्राप्ति है? क्या इस ज्ञान से हमारी वर्तमान समस्याओं का हल प्राप्त हो सकता है? मानव अध्यात्म में रुचि तभी लेगा, जब उसे यह ...