आगरा, जनवरी 30 -- कुष्ठ रोगियों के साथ सहानुभूति और प्रेम रखने के साथ उनकी निगरानी भी बेहद जरूरी है। सामाजिक भेदभाव के चलते लगभग 20 फीसदी रोगी आत्महत्या की कोशिश करते हैं, इसलिए इलाज के साथ उनके व्यक्तिगत और सामाजिक पहलुओं पर भी गौर करने की गंभीरता से जरूरत है। कुष्ठ दिवस पर शुक्रवार को यह नसीहत मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के निदेशक डा. दिनेश राठौर ने जागरूकता कार्यशाला के दौरान दी है। उन्होंने कहा कि रोग से जुड़ी विकलांगता के कारण मरीजों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इस कारण करीब 10 से 40 फीसदी रोगी मानसिक रोगों का शिकार हो सकते हैं। गरीबी, बढ़ती उम्र, विधवा महिलाएं, देहात की पृष्ठभूमि और सामाजिक भेदभाव के कारण यह खतरा लगातार बढ़ता जाता है। व्यक्ति परिवार और समाज से लगातार कटता जाता है, इसलिए इलाज के साथ काउंसलिंग की व्यवस्था समय की मांग है। कार...