रांची, अगस्त 6 -- रांची, विशेष संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने वर्ष 2017 में दाखिल एक आपराधिक याचिका करीब आठ साल तक सूचीबद्ध नहीं होने पर गंभीर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि पूरी न्यायिक व्यवस्था वादियों के हित के लिए है। ऐसे में वर्षों तक किसी मामले का सूचीबद्ध नहीं होना उचित नहीं है। अदालत ने रजिस्ट्रार जनरल को उन मामलों की जानकारी जुटाकर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है, जो वर्षों से सूचीबद्ध नहीं हुए हैं। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने श्रीकांत राय बनाम झारखंड सरकार एवं अन्य से जुड़े मामले में यह आदेश दिया है। यह याचिका वर्ष 2017 में दाखिल की गई थी। हाईकोर्ट की रजिस्ट्री की ओर से अदालत को बताया गया कि लंबित फाइलों के भौतिक सत्यापन के दौरान गर्मी की छुट्टियों में इस मामले की फाइल मिली। फाइल क्रिमिनल डिस्प...